॥ शिक्षापत्र १८ और १९ — परम तत्व ज्ञान एवं कलिकाल में शरण का महत्व ॥
श्रीवल्लभाचार्य विद्यापीठ, हालोल — नित्य पुष्टिस्वाध्याय
यह सत्र शिक्षापत्र अवगाहन पर आधारित है, जहाँ श्रीहरिरायजी कृत 18वें और 19वें शिक्षापत्र की कारिकाओं का अवगाहन किया जा रहा है। 18वें शिक्षापत्र में भगवत्सेवा में स्वातंत्र्य के निषेध, चार परम तत्वों के ज्ञान और शिक्षा प्रदान करने के अधिकारी की योग्यता का निरूपण किया गया है। तत्पश्चात 19वें शिक्षापत्र में कराल कलिकाल के प्रभाव, कुसंग से बुद्धि नाश, सत्संग की दुर्लभता और ऐसे समय में अष्टाक्षर मंत्र तथा श्रीमदाचार्यजी के शरण के महत्व पर गहन चर्चा प्रस्तुत की गई है।